डॉ. अव्यक्त अग्रवाल*********************
कल फ़िर एक बच्ची आयी मेडिकल कॉलेज में। गंभीर,बेहोश एवं झटके के साथ। मस्तिष्क को बहुत नुकसान पंहुचा। जान तो हम बचा पाये वेंटीलेटर के सहारे लेकिन मस्तिष्क में पंहुचे नुकसान को शायद ही ठीक किया जा सके। हुआ जो था उसने ही यह पोस्ट लिख, लोगों को जागरूक करने का विचार आया। बच्ची एक वर्ष की है और हुआ यह कि घर के किचन में एक छोटी सी टंकी थी जिसमें बच्ची माँ को सर के बल डूबी मिली,पता नहीं कितने देर से।
हर शिशु रोग विशेषज्ञ एवं शिशु अस्पताल इस तरह के अनेक हादसे हर वर्ष देखता है। निम्न लिस्ट लिख रहा हूँ जिसे हर उस परिवार में होना चाहिए जिसमें छोटे बच्चे हों :
1. बच्चा बाथरूम में न पंहुच सके ऐसा इंतेज़ाम रखिये। जैसे दरवाज़ा बंद रखना । मैं अपने करियर में 3 बच्चे सिर्फ बाल्टी में सर उलट जाने की वज़ह से गंभीर हालत में लाये हुए देख चुका हूँ। मुझसे अनेकों चिकित्सक सैकड़ों ऐसे केसेस देखते होंगे।
2. सिक्के,मूंगफली,चने,सीताफल के बीज,नारियल के टुकड़े,कच्चे चावल,बादाम जैसी छोटी और कड़ी चीज़ें प्रतिवर्ष अनेक बच्चे अपनी स्वांस नली में फंसा लेते हैं। जिनसे मृत्यु भी हो ज़ाती है अथवा समय पर लाने पर ब्रोंकोस्कोपी नामक महंगी और रिस्की प्रक्रिया से इन foreign body को निकाला जाता है।
एक बेहद इंटरेस्टिंग केस मेरे पास आया था 2 वर्ष की बच्ची को दो माह से बहुत खांसी थी और दो बार न्यूमोनिया से कहीं भर्ती हुई थी,अस्थमा का इलाज़ भी चल रहा था।। जब मेरे पास लायी गयी तो लक्षणों के आधार पर मुझे संभावना लगी कि कुछ अटका हो सकता है स्वांस नली में। लेकिन घर के किसी भी सदस्य को नहीं पता था कि उसे कुछ भी खाते खाते अचानक खांसी शुरू हुई थी 2 माह पूर्व।
लेकिन हमने ब्रोंचोस्कोपी का निर्णय लिया और उसमें क्या मिला? नारियल का टुकड़ा। जिसे निकालने के बाद बच्ची पूर्णतः स्वस्थ हो गयी। अतः छोटे बच्चों के हाथों में इस तरह के बीज,कंचे,सिक्के नुमा चीज़ें न आने दें न ही घर में फैला कर रखें। बीज़ वाले फल अपने सामने खिलाएं और हमेशा बैठा कर। लेटे होकर कुछ भी खाने से स्वांस नली में जाने की संभावना बढ़ ज़ातीं है। (मेरा एडिट: दादी-नानी या हिन्दुत्ववादी जब पलंग पर बैठ के या लेट के खाने पर टोकते हैं, तो उतनी मूर्खता नहीं कर रहे होते हैं|)
3. केरोसिन: मिट्टी का तेल अथवा पेट्रोल बहुत से बच्चे 5 वर्ष की उम्र तक के पीकर आ जाते हैं। इन दोनों ही तेलों से बच्चों में गंभीर केमिकल निमोनिया होता है साथ ही इस गंभीर ज़हर को काटने का कोई एंटीडोट भी नहीं होता। कम तेल पिया हो तो बच जाते हैं लेकिन 50 ML से ज़्यादा मात्रा में गंभीर होने की सम्भावना एवं मृत्यु की संभावना बन ज़ातीं है।
बहुत से परिवार पेट्रोल,मिट्टी के तेल,तारपीन तेल को ज़हर नहीं मानते और यूँ ही रखे रहते हैं। बच्चों की पंहुच से इन्हें हमेशा दूर रखें। (मेरा एडिट: किरासन/मिटटी के तेल को जहर की तरह इस्तेमाल कर के आत्महत्या करने वाले दसवीं के बच्चों का हमें पता है, ये होता है |)
4. प्रति वर्ष बिना मुडेर की छत से गिरकर या बालकनी से गिरकर छोटे एवं बड़े बच्चे दोनों ही हर शहर में आते ही रहते हैं,गंभीर हेड इंजुरी के साथ। ऐसी छत का ध्यान रखिए , पैरापेट वाल ज़रूर हो और बच्चे नज़र में हों।
5. गर्म दूध,पानी,चाय से जलकर आने वाले बच्चे बहुत हैं। ध्यान रखिए।
6. सांप, कुत्ते,काटने के बहुत केस आते हैं।
7.कभी कभार करेंट लग कर गंभीर समस्या के बच्चे दिख जाते हैं। कूलर ,खुले वायर का ध्यान रखें।
8. टीवी को अपने ऊपर गिरा कर आने वाले बच्चे भी मिल जाते हैं। एक की मृत्यु भी देखी। छोटे स्टैंड पर टीवी न रखी हो जिसे बच्चे हिला सकें।
9.मोहल्लों की सड़कों पर बच्चे दौड़ते हैं और तेज़ चलती बाइक या कार के बीच आ जाते हैं।
उपरोक्त होने वाली गलतियों से बच्चों की मृत्य,परिवारों को बहुत बड़े दुःख और तकलीफों से बचाया जा सकता है। गलती हो जाने से बेहतर पहले औरों से हो चुकी गलतियों से सीखना है। जिनके छोटे बच्चे हैं वे इन पॉइंट्स को पढ़ लें,सेव कर लें।
आपका
डॉ अव्यक्त
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