Friday, January 20, 2017

यात्रा वृतांत

मॉरिशस, अफ्रीका का सबसे समृद्ध देश। एक ऐसा देश जिसके विषय में हर भारतीय को पता होना चाहिए। क्यों? आपको इस यात्रा वृतांत को पढ़ने के बाद पता चल जायेगा।
वहां जाने के पहले मुझे कुछ कुछ तो पता था ही आप सब की तरह। लेकिन करीब से जानने में नयी बातें पता चलीं।
हम मुम्बई से मॉरिशस 6 घंटे की हवाई यात्रा के बाद जिस एक मात्र इंटरनेशनल एअरपोर्ट पंहुचे थे उसका नाम है, 'सर सीवूसागुर रामगूलम इंटरनेशनल एअरपोर्ट।'
सर रामगूलम भारत से वहां जा बसे बेहद लोकप्रिय चिकित्सक थे । गरीबों के मसीहा। और जब 1968 में मॉरिशस आज़ाद हुआ तब रामगूलम की लोकप्रियता ने उन्हें वहां का पहला प्रधानमंत्री बनवाया।
एअरपोर्ट के एग्जिट गेट से निकलते ही, तीन मनी एक्सचेंज काउंटर से हम सभी को आवाज़ें दी जाने लगीं। जिनमें से सबसे ज़्यादा लोग उन तीन लड़कियों के काउंटर से ही मनी एक्सचेंज कर रहे थे।
लड़कियां जीन्स, और टी शर्ट पहने हुए, भारतीय नाक नक्श की लग रही थीं। और वे जो कह रही थीं,कुर्सी पर खड़े हो कर हिंदी में, वह था....
" भाई साहब यहाँ आइये, मनी एक्सचेंज करवाईये।"
हम से पहले पंहुचे लड़कों ने उन्हें कुछ कहा था तो उन्होंने हिंदी में ही कहा, हम आपको राखी भिजवाएंगे आप मिठाई ले कर आना।
लड़कों के चेहरे साफ़ बुझते से दिखे थे।
मनी एक्सचेंज के समय मैंने पूछा आप इतनी अच्छी हिंदी कैसे बोलते हैं।
" लड़कियों ने कहा, हमारे पूर्वज बिहार से थे। हम मौरिशन हिन्दू हैं।"
एअरपोर्ट से बाहर हमें जो ट्रेवल एजेंसी का गाइड मिला उसका नाम अमर था। वह भी बिल्कुल हमारी सी हिंदी ही बोलता हुआ।
मेरे सवाल कि आपने हिंदी कैसे सीखी उसने भी वही ज़वाब दिया।
"हमारे पूर्वज बिहार से थे। दादा के भी दादा यहाँ आये थे।"
कार में बैठने पर जो ड्राईवर 'केविन' मिला वह अफ्रीकन,मौरिशियन् मूल का लग रहा था। उसे हिंदी नहीं आती थी, लेकिन लगभग एक घंटे दूर स्थित होटल तक पंहुचते वह वहां के ऍफ़ एम् में सिर्फ और सिर्फ हिंदी गाने सुनते और सुनाते गया। उसने बताया उसे बॉलीवुड गाने अच्छे लगते हैं। ऍफ़ एम् में रेडियो जॉकी वहां की लोकल भाषा क्रेओल में बोलती लेकिन गाने हमारे सुनाती।
केविन ने बताया भारत की ही तरह यहाँ भी भारतीय फिल्में शुक्रवार को रिलीज़ हो जाती हैं। यहाँ की अपनी फिल्म इंडस्ट्री नहीं है। हाँ टीवी सीरियल बनते हैं,क्रेओल में।
रास्ते खूबसूरत थे, रोड पूरे रास्ते बिना किसी टोल के भारत के सर्वश्रेष्ठ रास्तों सी थी।
आजू बाज़ू गन्ने के बड़े बड़े खेत और सामने ऊंचे पहाड़, tall dark handsome पहाड़, लेकिन अकेले..... इन हैंडसम पहाड़ों पर प्यार बरसाने उतर आयी घनी सफ़ेद बदलियां, पहाड़ों को चूमते हुए।
मौसम सुहाना,न गर्म न ठंडा। हल्की धूप।
होटल पंहुच, होटल का बीच मिलते ही सभी बच्चे ख़ुशी से उछलने लगे थे।
नीला, साफ़, पारदर्शी समुद्र। लेकिन काफी शांत। Mauritius से शांत रहना सीखा था हिन्द महासागर ने कि हिन्द महासागर से मॉरिशस ने। पता नहीं।
विशाल नीला समुद्र, इर्द गिर्द सुदूर दिखते पहाड़। आसमान और समुद्र का एक ही रंग। क्या पता यह समुद्र आसमान और उसमें बैठे ईश्वर का कोई आइना हो।
शांत,हल्की ठंडी हवा, और लहरों के टकराने और जाने की आवाज़ें। कुछ गौरैयों, कोयल और सुन्दर चिड़ियों की चीं,चीं। सबकुछ स्लो मोशन में गुज़रता सा, प्रकृति ने शायद हिप्नोसिस की क्लास लगाई थी।
गौरैया इंसान से इतनी हिली मिली कि मेरे हाथ से खाना ले जाती।
होटल के 80 प्रतिशत स्टाफ हिंदी बोल लेते थे। ज़बकि भारत कभी नहीं गए थे।
हमने वहां लोकल बस में भी ट्रेवल किया और टूरिस्ट बस में भी।
टूरिस्ट बस में एक नियम बेहद सख्ती से मनवाया जाता है वो है कि बस की खिड़कियां जो कि बड़ी बड़ी और कांच की होती हैं, हमेशा बंद रहना चाहिए, साथ ही बस के भीतर कुछ भी खाना, सिगरेट, शराब पीना सख्त मना है। छोटे छोटे कस्बों और गांवों में तक ज़गह,ज़गह कैमरे लगे हैं। पुलिस तो मुझे कहीं दिखाई ही नहीं दीं लेकिन ड्राईवर और गाइड का कहना था कि इन कैमरों से नज़र रखी जाती है। खिड़की इसलिए नहीं खोलना कि कोई कहीं कुछ न फेंके।
बसों में पंक्ति लिखी होती ..cleanliness is the godliness....
गाइड रेहान और ड्राईवर विक्रम, दोनों ने ही यह कहा कि नियम अपनी ज़गह है लेकिन कोई भी मौरिशियन यहाँ गन्दगी नहीं कर सकता। क्योंकि टूरिस्म, हम सबकी रोज़ी रोटी है। यहाँ गन्दा होगा तो आप क्यों आओगे।
ड्राईवर रेहान ने बताया कि वो एक मौरिशियन् मुस्लिम है। और जब भारतीय उसके साथ घूमते हैं उसे उर्दू में बात करना बहुत अच्छा लगता है। हालाँकि उसकी उर्दू विक्रम की हिंदी से अलग नहीं लगी थी।
उसने बताया कि यहाँ के लोगों को स्कूल में क्रेओल,इंग्लिश और फ्रेंच सीखना ज़रूरी है। फ्रेंच और ब्रिटिश दोनों ने यहाँ लंबे समय तक राज़ किया था। फ्रेंच को हरा ब्रिटिश ने यह आइलैंड छीना था और सौ से ज़्यादा वर्ष तक राज़ किया।
क्रेओल फ्रेंच से काफी मिलती जुलती भाषा है। जिसमें अफ्रीकन शब्द भी हैं।
अफ्रीका, और भारत से लाये गए मज़दूरों के लिए ब्रिटिश ने यह नयी भाषा बनाई थी।
लेकिन सबसे प्रमुख बात यह कि सभी हिन्दू को हिंदी और मुस्लिम्स को उर्दू सीखना ज़रूरी है वरना माता पिता को जुर्माना देना होगा।
मतलब यह कि मॉरिशस सरकार अपनी सांस्कृतिक धार्मिक पहचान को संरक्षित रखने लोगों को प्रेरित करती है।
हाँ मज़ेदार बात, छोटे बड़े लगभग 50 प्रतिशत मकानों में मुझे आँगन में छोटे से मंदिर बने दिखे। और लगभग हर एक किलोमीटर पर कॉलोनी में बना एक मन्दिर।
सभी शादी शुदा हिन्दू महिलाएं छोटी सी मांग भरे दिखीं एक बिंदी के साथ। इनमें मॉल में काम करती नयी शादी शुदा, 5 स्टार होटल की रिसेप्शनिस्ट से लेकर एयरहोस्टेस तक शामिल हैं।
गाइड विक्रम ने बताया कि यहाँ 55 प्रतिशत हिन्दू, 25 प्रतिशत मुस्लिम्स और बाक़ी अन्य धर्म हैं।
200
वर्ष से ज़्यादा डच,फ्रेंच और ब्रिटिश सत्ता के बावज़ूद क्रिस्टियन वहां कम हैं। ब्रिटिश ने भी उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान कभी बदलने की कोशिश नहीं की। इसलिए ब्रिटिश के प्रति उनके मन में कड़वाहट नहीं है।
भारतीय, अफ्रीकी, फ्रेंच मूल के लोग ज़्यादा हैं।
हिंदुओं में ज़ाति जैसी कोई प्रथा ही नहीं है। कोई ज़ाति नहीं मानी जाती। दहेज़ का कोई कांसेप्ट ही नहीं है। 
ज़्यादातर शादियां प्रेम विवाह होती हैं।
हिन्दू,और मुस्लिम्स में 1968में स्वतंत्रता के समय एक मात्र दंगा हुआ था जिसमें 300 लोग मारे गए थे। इसके बाद से कभी कोई लड़ाई नहीं हुई।
हाँ उनकी शादियां आपस में नहीं होतीं। कोई लड़का या लड़की आपस में शादी करना चाहे तो माता पिता की ओर से अहिंसक विरोध होता है। बालिग लोगों का सरकार साथ देती है।
मुस्लिम्स के लिए बड़ी और बहुत अच्छी मस्ज़िद है, पोर्ट लुइस में। वहीं कुछ मदरसे भी। रेहान ने बताया कि हमारे यहाँ बुर्का नहीं के बराबर है।
मेरी बात वहां के प्लास्टिक सर्जन और पूर्व डायरेक्टर जर्नल हेल्थ से भी काफी देर हुई। उन्होंने कोलकाता से mbbs किया था कभी। वे अस्थमा एवं एलर्जी पर मेरे लेक्चर के चेयरपर्सन थे। उन्होंने कहा हम खुद को सेक्युलर नहीं प्लूरल कहते हैं। मतलब कई तरह की धार्मिक,सांस्कृतिक मान्यताओं वाला देश।
एक एक्वेरियम में अलग अलग तरह की मछलियाँ और कछुए जैसे बिना एक दूसरे को नुकसान पंहुचाये तैरते रहते हैं अपने अपने रंग बिखेरते। मॉरिशस कुछ वैसा ही खूबसूरत विशाल एक्वेरियम सा लगा। ईश्वर के ड्रॉइंग रूम में सजा एक्वेरियम।
मॉरिशस में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी शिव प्रतिमा और 13 वें ज़्योतिर्लिंग हमने देखे। इस मंदिर ले जाते समय ड्राईवर रेहान ने हिंदी की कहावत कुछ यूँ कही.....पहले सिर्फ पूजा फिर काम दूजा।
सबसे बड़ी पहली प्रतिमा गुड़गांव और दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा काठमांडू में है यह हमें गाइड विक्रम ने बताया। बस में किसी भी भारतीय को नहीं पता था कि भारत में सबसे बड़ी शिव प्रतिमा है,और है तो कहाँ है।
रोड के सामानांतर उतनी ही बड़ी दुर्गा माँ की प्रतिमा बनते दिखी। यह प्रतिमाएं बिरला समूह ने दान की हैं।
गंगा तलाव मंदिर में 13 वें ज़्योतिर्लिंग हैं। मंदिर बेहद शांत, साफ़ सुथरे हैं। हिन्दू पुजारी साफ़ मंत्रोचारण करते हुए। मंदिर के बाहर बेहद सुव्यस्थित मेडिकल पोस्ट बनी थीं जो कि शिव रात्रि के समय जब हज़ारों लोग आते हैं दर्शन और पूजा के लिए तब सुचारू उपचार के काम आती हैं।
मुझे वहां रास्तों में कुछ भारतीय धर्मगुरुओं के पोस्टर दिखे, व व्याख्यान के। लेकिन पूरे मॉरिशस में कहीं भी किसी राजनीतिज्ञ के पोस्टर या होर्डिंग नहीं दिखे।
ज़गह ज़गह मिलने वाले स्ट्रीट फ़ूड में समोसा, दाल पूड़ी बेहद लोकप्रिय है।
गरीबी,बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार, अपराध वहां नहीं के बराबर है।
पोर्ट लुइस के घने ट्रैफिक में भी हार्न की एक भी आवाज़ सुनायी नहीं दी कहीं।
कम से कम 15000 रूपये हर व्यक्ति कमाता है।
सबका अपना घर है। जिनका नहीं है उन्हें सरकार देती है। किराये से रहने का सिस्टम ही नहीं है।
बच्चों की सम्पूर्ण पढ़ाई, किसी भी बस का ट्रेवल 18 वर्ष की उम्र तक मुफ़्त है। प्राइवेट स्कूल सिर्फ 2 हैं।
24 घंटे एम्बुलेंस और चिकत्सा हर नागरिक को मुफ़्त है।
वहां नेवी नहीं, आर्मी न के बराबर मात्र सिंबल के रूप में है। ट्रेन एक भी नहीं।
उनके पड़ोसियों मेडागास्कर और साउथ अफ्रीका से उन्हें कोई खतरा नहीं।
हवाई सफ़र से 2 घंटे दूर स्थित एक आइलैंड पर अमेरिकन आर्मी ने एक बेस बनाया हुआ है।
लोग सुबह से शाम काम करने, कमाने और परिवार के साथ मस्त रहने वाले हैं।
खुशहाल जीवन की वज़ह से ज़्यादातर खुशमिजाज़,मज़ाकिया और मदद करने वाले मिले।
हिन्दू,मुस्लिम सभी का अभिवादन का तरीका गाल से गाल मिलाना है। और पुरुष,महिलाएं सभी आपस में इसी तरह अभिवादन करते हैं। लेकिन हमसे नमस्ते ही कहते।
अभी के प्रधानमंत्री #अनिरुद्ध #जगन्नाथ के घर के सामने से हमारी बस निकली। एक भी पुलिस कर्मी गेट पर नहीं। घर भी बहुत बड़ा नहीं।
गाइड ने बताया कि क्योंकि कोई सुरक्षा खतरा नहीं इसलिए मात्र चार पुलिस कर्मी साथ रहते हैं वे जब कहीं भी जाते हैं।
वाटर स्पोर्ट पसंद करने वालों के लिए विश्व की सारी गतिविधिधियां यहाँ उपलभ्द हैं।
Underwater scooter का मज़ा मैंने बच्चों के संग लिया। ट्रेवल एजेंट ने बताया विश्व में सिर्फ मॉरिशस में ही पानी के 8 मीटर नीचे चलने वाली यह स्कूटर उपलब्ध् है।
कुल मिलाकर मॉरिशस एक छोटा सा बेहद सुन्दर द्ववीप् भारतीयों और ब्रिटिश द्वारा बनाया गया। 
लेकिन सही मायनों में अनेकता में एकता, साफ़ सफाई, ईमानदारी, आर्थिक समानता के पाठ हमें सिखा जाता है।
वहां के चुनावी मुद्दे सिर्फ और सिर्फ विकास, रोज़गार, घर जैसे हैं। समाज जातियों में नहीं बंटा। धार्मिक मान्यताएं,सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं और सहेजी गयी हैं, इनका उपयोग राजनीतिक और आधिपत्य के लिए करना अब तक वे नहीं सीख पाये हैं।
मॉरिशस का खाना कई मायनों में बिल्कुल हम सा है।मसाले वही सब। गली से लेकर 5 स्टार तक समोसा पसंदीदा स्नैक्स है। नारियल के लड्डू,बर्फी,बूंदी के लड्डू, गुझिया जैसी मिठाइयां आम मिठाई दुकानों पर मिल जाएंगी। हाँ वहाँ हमारे जैसे नमकीन नहीं खाये जाते।
हर चीज़, हमसे लगभग 2 से 4 गुना महंगी है,भारतीय रुपयों में,एक को छोड़ कर। और वो है, ज़मीन। जितने भारतीय रुपयों में हम भारतीय फ्लैट या डुप्लेक्स लेते हैं वहां समुद्र के पास बड़ा बंगला ले सकते हैं। लेकिन अमीर गरीब का फर्क वहां कम होने से हमें न तो झोपड़ी दिखीं, न ही बड़े आलीशान बंगले। घरों की बनावट बहुत हद तक हम जैसी ही है, छतों पर रस्सियों में सूखते वैसे ही कपड़े। लेकिन एक भी कॉलोनी में कचरा या गन्दगी नहीं दिखी।
मॉरिशस की कुल आबादी हमारे छोटे शहर जबलपुर से भी कम है। 12 लाख लगभग। लेकिन राजधानी पोर्ट लुइस दुनिया के सबसे ज़्यादा जनसंख्या घनत्व वाले शहरों में से एक है। पोर्ट लुइस सुव्यस्थित शहर है। 
तीन अलग अलग भागों में बंटा हुआ। पहाड़ के एक ओर रिहायशी इलाका, एक ओर व्यावसायिक और एक ओर पोर्ट है।
मॉरिशस का ज़मीनी भाग, 97 km लंबाई और 77 km चौड़ाई में ख़त्म हो जाता है। कुल 5 शहर हैं, कुछ कसबे और गाँव हैं। कोई राज्य ही नहीं है। 
बिजली,साफ पानी 24 घंटे हर क्षेत्र में है।
एक ही चीज़ अखरी। वह यह कि सब कुछ शाम 6 बजे बंद हो जाता है। हालांकि ग्रांड बे नाम के छोटे लेकिन बेहद विकसित कसबे में नाईट क्लब और पब खुले होते हैं।
शाम होते हम होटल लौट आये थे। रविवार को पूरा मॉरिशस बंद होता है। सब परिवार के साथ घूमते हैं। 
गाइड विक्रम भी खुश था कल की छुट्टी को।
मैंने पूछा मॉरिशस की समस्याएं क्या हैं?
उसने हंस कर कहा "यहाँ लड़कियां कम हैं।
मेरे ज़िंदगी में एक ज्वालामुखी की ज़रूरत है। अकेला हूँ।"
मैं हंसा। ज्वालामुखी???
'वो बोला हाँ सर मुझे गाइडिंग करते करते इतना मालूम हो गया है कि ये सब ज्वालामुखी ही होती हैं।'
मेरा मन किया कहूँ कि भाई गाइड तो मैं भी था, मुझे यह अक्ल समय पर क्यों न आयी। लेकिन वो पास ही थी....क्रेटर। तो बोल न सका।
और फिर वो हमारे कुमार सानू का गाना ''सांसों की ज़रूरत हो जैसे ......बस एक सनम चाहिए,आशिकी के लिए" गाते हुए उतर गया।
मैं फिर समुद्र में डूबते नारंगी सूरज को देखते सोच रहा था......
मार्क ट्वेन ने यूँ ही नहीं कहा होगा कि,
'आखिर आप जान ही जाते हो कि भगवान् ने पहले मॉरिशस बनाया फिर उसकी नक़ल कर स्वर्ग बनाया।'
आपका
अव्यक्त

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