Saturday, January 28, 2017

बच्चों का दिमागी विकास खेल खेल में

30 Point system a psychological trick
5 साल से ऊपर के बच्चों के लिए एक आसान लेकिन असरदार मनोवैज्ञानिक ट्रिक ।
करना सिर्फ इतना है माता पिता को कि बच्चे को किसी भी अच्छे काम के लिए कुछ पॉइंट्स देने हैं और गलत काम के लिए पॉइंट्स घटाने हैं।जब बच्चों के पास निश्चित पॉइंट्स इकट्ठे हो जाएँ तब उन्हें कोई भी छोटी या उनकी मनपसंद गिफ्ट दीजिये।
जैसे पार्क ले जाना या कोई फ़िल्म दिखाना या कोई खेल का सामान या एक अच्छी बुक या कोई मनपसंद खाना देना।जब आप ये गिफ्ट दे दें तो नए सिरे से पॉइंट शुरू करिये।बड़ी गलती पर पॉइंट्स 0 भी किये जा सकते हैं ये बता कर रखिये।
पॉइंट देते समय थोड़ा उदार रहिये।लचीलापन रखिये।छोटी मोटी शैतानियों को नज़रअंदाज़ करिये।पॉइंट कितने और कब देने हैं ये अधिकार सिर्फ अपने पास रखिये।पॉइंट लिखने की ज़रूरत नहीं आपको याद रहेंगे।लेकिन बच्चे को पहले से बता कर रखिये कि तुम्हें 30 पॉइंट्स कमाने पर गिफ्ट मिलेगी।गिफ्ट मिलने पर पॉइंट 0 और फिर वही प्रक्रिया शुरू करनी है।बच्चा चाहे तो बड़ी गिफ्ट जैसे साइकिल के लिए पॉइंट्स इकठ्ठा भी कर सकता है।
अच्छे काम किसी भी तरह के हो सकते हैं जैसे बड़ों की बात मानना,कोई प्यारी मीठी बात कहना,पौधों को पानी देना,होमवर्क पूरा करना,किसी प्रतियोगिता में अपना अच्छा प्रयास करना,भाई या बहन की केअर करना,स्कूल जाने में नहीं रोना इत्यादि।
फायदे:
1.पहला फायदा तो इस खेल में बच्चों को मज़ा बहुत आता है।साथ ही माता पिता का उनकी गतिविधयों में सम्मिलित होना उनमें सुरक्षा की भावना जगाता है।
2.बच्चों को बिना सजा दिए ही गलती पर आप हतोत्साहित कर पाएंगे।और गलत काम से नुकसान होता है यह सन्देश जीवन भर के लिए बच्चे के दिमाग में समाहित करवा पाएंगे।
3.इस खेल में बच्चों को पॉइंट्स कमाने पड़ते हैं जिससे उनमें कुछ अच्छा करके कमाने की भावना जाग्रत होती है।मेहनत करने का महत्व पता चलता है।
4.पॉइंट कम हो जाने पर पॉइंट फिर से मिल सकते हैं जिससे persevernce/जुटे रहने की भावना विकसित होती है।
5.जन्हाँ दो बच्चे 5 साल के ऊपर हों वँहा स्वस्थ प्रतियोगिता उत्पन्न होती है।
6.बड़े होने पर ये खेल उनके दिमाग में आपकी यादों का एक अहम् हिस्सा होगा।
7.हम खेल खेल में उन्हें बेहतर नागरिक बना सकते हैं।जैसे कचरा डस्टबिन में ही फेंकने पर 10 पॉइंट्स।
8.इस तरह कमाई हुई गिफ्ट उनके लिए सिर्फ गिफ्ट ना हो कर सफलता और जीत का अहसास होती है।बच्चा ज़्यादा खुश होता है अपने आप मिली गिफ्ट की तुलना में।
ये कितना प्रभावी है?
यूँ तो हर बच्चा एवं माता पिता अलग अलग होते हैं।और पेरेंटिंग प्रकृति खुद ही सिखा देती है।हमसे बहुत बेहतर पेरेंट्स भी होंगे और उनके अपने तरीके भी प्रभावी होंगे lपरन्तु फिर भी....इस आसान से खेल का प्रयोग मैंने अपने दोनों बच्चों को तैराकी चैंपियन बनाने के लिए किया था।
जब रिजल्ट मिले तो मोहल्ले के बच्चों और अपने मरीजों को भी इसमें शामिल किया।मुझे 90 प्रतिशत माता पिता ने इस खेल के प्रभावी होने की बात कही।
कुछ माएं जो बच्चों को मारती थीं उन्होंने भी मारना बंद कर दिया क्योंकि उनके हाथ में अब एक अहिंसक सजा वाला हथियार था।
इस्तेमाल करिये और 10 दिन बाद review ज़रूर दीजिये।
आपका डॉ अव्यक्त

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